
*“रामो विग्रहवान् धर्मः”* — प्रभु श्री राम स्वयं धर्म का साकार अवतार हैं।
उन्हीं की दिव्य मर्यादा, अटल सत्यनिष्ठा, अद्भुत करुणा और अलौकिक शौर्य से मानव जीवन की नौका संसार-सागर को पार करती है।
इसी दिव्य विचारधारा को धारण कर यह समिति समाज में *धर्म, संस्कार, मर्यादा, सेवा, करुणा, शील और सत्य का प्रकाश* पुनः स्थापित करने का प्रण लेती है।
* काव्यमय संकल्प-पुष्प *
*“जहाँ राम के चरण पग धरे, वहाँ नीति-नीर बहायें हम,*
*मर्यादा की अमृत वृष्टि से, जीवन-वन को खिलायें हम।”*
*“धर्म-पथ कठिन सही, पर मधुर प्रभु नाम सहारा है,*
*हृदय-दीप में राम बसें, तो संकट भी कंगन पसारा है।”*
*“नर-सेवा ही नारायण-पूजा, यही तत्व महामंत्र बने,*
*पीड़ित मन की पीड़ा सुनकर, हम सब राम-दूत बनें।”*
*“जग में राम रमे जब-जब, तब कलुष का नाश हुआ,*
*हम भी रघुवर-नाम जपें तो भीतर का तम नाश हुआ।”*
* शास्त्रीय एवं संस्कृत-समृद्ध घोषणाएँ *
* *“धर्मो रक्षति रक्षितः”* — जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म स्वयं उसकी रक्षा करता है।
* *“यतो धर्मस्ततो जयः”* — जहाँ धर्म है, वहीं विजय है।
* *“सत्यं शिवं सुन्दरम्”* — सत्य ही शिव है, शिव ही सुन्दर है।
* *“रामः सत्पथ-दीपकः”* — राम सत्पथ को प्रकाशित करने वाले दीपक हैं।
* *“भक्तिर्हि परमानन्द-स्रोतः”* — भक्ति ही परम आनंद का स्रोत है।
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