शास्त्र–वाणी प्रसार

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शास्त्र–वाणी प्रसार

वेद, उपनिषद, रामायण, भगवद्गीता, संतवाणी, महापुरुषों के उपदेश और दिव्य ज्ञानामृत को समाज के प्रत्येक स्तर पर पहुँचाना—
ताकि ज्ञान से विवेक जन्मे, विवेक से चरित्र बने और चरित्र से राष्ट्र का पुनर्जागरण हो।

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