मास्टर चंपालाल जी पवार

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मास्टर चंपालाल जी पवार

मास्टर चंपालाल जी पवार – डीसीएम रामलीला परंपरा के शिल्पकार

जन्म वर्ष : 1902

मास्टर चंपालाल जी पवार, डीसीएम (DCM) के सुप्रसिद्ध ड्रामा डायरेक्टर थे। डीसीएम से जुड़ने से पहले वे उस स्वर्णिम युग के साक्षी रहे, जब पारसी थिएटर कंपनियाँ पूरे भारत में अपनी ख्याति के शिखर पर थीं। उस दौर में वे केवल निर्देशक ही नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट डांस डायरेक्टर एवं म्यूजिक डायरेक्टर भी थे। पारसी थिएटर के अनेक प्रसिद्ध नाटकों में उन्होंने निर्देशन एवं नृत्य संयोजन का कार्य किया और अपने कलात्मक कौशल की अमिट छाप छोड़ी।


???? डीसीएम से जुड़ाव और रामलीला परंपरा की शुरुआत

लगभग 1950 के आसपास मास्टर चंपालाल जी ने डीसीएम ज्वाइन किया। डीसीएम में आने के बाद वे वहाँ के ड्रामा डायरेक्टर बने।

डीसीएम के संस्थापक लाला श्रीराम जी के विशेष आग्रह पर उन्होंने डीसीएम में रामलीला का सम्पूर्ण कार्यभार अपने हाथों में लिया। इसके अंतर्गत उन्होंने:

  • डीसीएम के मजदूरों

  • ऑफिसर्स

  • स्टाफ

  • एवं उनके परिवारों

को एकत्र कर, प्रशिक्षित कर एम्प्लॉई आधारित रामलीला परंपरा की नींव रखी।


???? दिल्ली की रामलीला शैली का निर्माण

आज दिल्ली में जो रामलीला का भव्य और सुसंस्कृत प्रारूप देखने को मिलता है, उसका मूल श्रेय मास्टर चंपालाल जी पवार को जाता है।

उन्होंने रामलीला की स्क्रिप्ट इस प्रकार तैयार करवाई जिसमें –

  • बनारस एवं अयोध्या शैली का समावेश

  • राधेश्याम जी की रामायण

  • रामचरितमानस की चौपाइयों पर आधारित संवाद

  • केशवदास जी की ‘रामचंद्रिका’ से लिए गए प्रभावशाली संवाद

का सशक्त उपयोग किया गया।


????‍???? शिष्य परंपरा – डीसीएम की पहचान

मास्टर चंपालाल जी ने अपने शिष्यों को इतनी उच्च कोटि का प्रशिक्षण दिया कि आज दिल्ली की लगभग सभी प्रमुख रामलीलाओं में उनके शिष्य डीसीएम की पहचान के साथ कार्य कर रहे हैं।

आज दिल्ली में –

  • अशोक विहार फेज-1

  • अशोक विहार फेज-2

  • शालीमार बाग

  • करोल बाग

  • पंजाबी बाग

  • साउथ दिल्ली

आदि क्षेत्रों की रामलीलाओं में डीसीएम पद्धति के अनुसार मंचन हो रहा है।


???? सुपुत्र श्री सोमनाथ पवार

उनके सुपुत्र श्री सोमनाथ पवार वर्तमान में –

  • अशोक विहार फेज-1 रामलीला के निर्देशक हैं

  • स्कूल के बच्चों के अंतर्राष्ट्रीय रामलीला महोत्सव एसोसिएशन से भी जुड़े हैं

वे पिछले 45 वर्षों से निरंतर अशोक विहार की रामलीला का निर्देशन कर रहे हैं और यह सब उन्हें अपने पिता मास्टर चंपालाल जी के आशीर्वाद से प्राप्त हुआ है।


???? डीसीएम कलाकार – गर्व की परंपरा

हम सभी स्वयं को गर्व से कहते हैं –

“हम डीसीएम के कलाकार हैं।”
चाहे हमने छोटे रोल निभाए हों या बड़े,
हम सभी मास्टर चंपालाल जी की कला-परंपरा के वाहक हैं।


???? पारसी थिएटर से डीसीएम तक – एक जीवन, एक युग

मास्टर चंपालाल जी पवार ने –

  • पारसी थिएटर के स्वर्णिम युग में

    • अनेक नाटकों का निर्देशन

    • नृत्य निर्देशन

    • संगीत संयोजन

किया और डीसीएम में आकर वहाँ के कलाकारों तथा उनके परिवारों को तैयार कर, दिल्ली को एक सशक्त रामलीला परंपरा प्रदान की।


???? मास्टर चंपालाल जी पवार –
आप केवल निर्देशक नहीं थे,
आप दिल्ली की रामलीला संस्कृति के निर्माता थे।

 

 

 

 

 

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