
नर-सेवा को नारायण-सेवा मानकर जीवन को सार्थक करने वाले आप ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिनका सम्पूर्ण जीवन त्याग, करुणा और लोकमंगल की भावना से आलोकित है। आपके परिवार में धर्म-सेवा, समाज-सेवा और राष्ट्र-सेवा की जो सुदीर्घ परंपरा रही है, उसी परंपरा को आपने अपने आचरण और कर्म से न केवल जीवित रखा, बल्कि उसे और अधिक ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।
आप समाज के एक प्रतिष्ठित, सम्माननीय एवं प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व हैं। धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से आपने जनसेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया है। श्री रामलीला कमेटी, पीतमपुरा के अध्यक्ष के रूप में आप सनातन संस्कृति, मर्यादा और आदर्शों के प्रचार-प्रसार में निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वहीं श्री शिव मंदिर, पीतमपुरा के अध्यक्ष के रूप में आपकी सेवाएँ श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का सुदृढ़ केंद्र बनी हुई हैं।
पंजाबी बाग रामलीला के ट्रस्टी के रूप में आपकी सहभागिता सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन का प्रमाण है। इसके साथ-साथ महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल हॉस्पिटल के ट्रस्टी के रूप में आप स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी मानवता की निःस्वार्थ सेवा कर रहे हैं। खाटू श्याम धाम के ट्रस्टी के रूप में आपकी भूमिका श्रद्धा, भक्ति और सेवा के त्रिवेणी संगम का जीवंत उदाहरण है।
कोरोना जैसी वैश्विक आपदा के कठिन समय में, जब मानवता भय और संकट से जूझ रही थी, आपने प्रतिदिन लगभग 5,000 लोगों के लिए निःस्वार्थ भोजन की व्यवस्था कर यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची सेवा वही है, जो विपत्ति के समय पीड़ित मानवता के काम आए। उस काल में आपका सेवा-भाव केवल सहायता नहीं, बल्कि आशा और संबल का स्रोत बना।
निस्संदेह, आपका जीवन मानव-सेवा को समर्पित एक तपस्वी जीवन है, जहाँ कर्म ही साधना है और सेवा ही आराधना। आप समाज के लिए एक प्रेरक प्रकाश-स्तंभ हैं, जिनके कार्य आने वाली पीढ़ियों को भी सेवा, समर्पण और संस्कार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते रहेंगे।
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