स्वर्गीय श्री कर्मवीर शर्मा

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स्वर्गीय श्री कर्मवीर शर्मा

श्री कर्मवीर शर्मा: एक जीवन,

गुजरावाला की धरती पर, जहाँ गंगा और जमुना की धाराएँ बहती हैं, एक ऐसा दीपक जला, जिसकी रोशनी ने पूरे जीवन को प्रकाशित किया। श्री कर्मवीर शर्मा, शिवदयाल शर्मा के सुपुत्र, एक ऐसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने जीवन को समाज सेवा और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दिया।

बाल्यकाल और शिक्षा

गुजरावाला में जन्मे कर्मवीर जी ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा वहीं पूरी की। 1947 का वह दर्दनाक वर्ष, जब देश का विभाजन हुआ, और उनका परिवार भारत आया। दिल्ली के प्रताप बाग गुड़मन्डी में उनका निवास हुआ, और फिर 1961 में किशनगंज अम्बा बाग उनकी कर्मभूमि बन गई। यहीं उन्होंने हिन्दी साहित्य में स्नातक और शास्त्री की डिग्री प्राप्त की, और ज्योतिष शिक्षा प्राप्त कर मां कामाख्या तान्त्रिक पीठ से "आचार्य" पद से सम्मानित हुए।

समाज सेवा और साहित्यिक योगदान

बाल्यकाल से ही स्वयंसेवक संघ से जुड़े कर्मवीर जी ने समाज सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। किशनगंज पदम नगर रामलीला से जुड़कर, उन्होंने मंच संचालन और मार्गदर्शक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उनके शब्दों में राम का स्वर, और हृदय में राष्ट्र का प्रेम, जनमानस को प्रेरित करता था।

राजनैतिक यात्रा

1980 में, एक राजनैतिक संगठन ने उन्हें निगम पार्षद का टिकट दिया, लेकिन उन्होंने अपने मित्र स्व. श्री ओम प्रकाश कौशिक जी को चुनाव लड़वाया और उन्हें विजयी कराया। यह उनकी निस्वार्थ सेवा और मित्रता का उदाहरण है।

परिवार और जीवन

श्रीमति संतोष शर्मा जी उनकी धर्मपत्नी थीं, जिन्होंने उनके जीवन को सँवारा। उनके पुत्र गुरुदत्त भारद्वाज हैं, जिन्होंने उनके आदर्शों को आगे बढ़ाया। 2003 जनवरी में, उन्होंने इहलोक यात्रा पूर्ण कर ली, लेकिन उनकी यादें और आदर्श आज भी हमें प्रेरित करते हैं।

विरासत

आज, उनका परिवार - गुरुदत्त भारद्वाज, रेखा शर्मा, और शाश्वत भारद्वाज - उनकी यादों को जीवंत रखे हुए हैं। श्री कर्मवीर शर्मा जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची सेवा और समर्पण से हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।

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