जागृति

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जन्म 23/09/1999, सिवान (बिहार) के एक छोटे से गांव मुबारकपुर में।

445, ग्रीन वैली अपार्टमेंट, नरेला, दिल्ली–110040

श्रीमती पुरंजना एवं श्री जे. पी. सिंह

अविवाहित

दिल्ली विश्वविद्यालय से समाज कार्य में परास्नातक (मास्टर्स), अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून एवं मानवाधिकार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा और IIM Banglore से एंटरप्रेन्योरशिप में सर्टिफिकेशन 

शैक्षणिक संस्थान: 
1. इंडियन स्कूल ऑफ इंटरनेशनल लॉ,
2. IIM, Banglore 
2. दिल्ली विश्विद्यालय,
3. केंद्रीय विद्यालय (टीपी ब्लॉक, पीतमपुरा)

विशेष उपलब्धियां: 

1. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में आयोजित संसदीय वाद–विवाद प्रतियोगिता में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, 
2. संयुक्त राष्ट्र सूचना केंद्र (United Nations) से सृजनात्मक लेखन में अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता
3. सेमी फाइनलिस्ट, राष्ट्रीय संसदीय वाद विवाद प्रतियोगिता, किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली विश्विद्यालय 
4. सेमी फाइनलिस्ट, राष्ट्रीय संसदीय वाद विवाद प्रतियोगिता, हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्विद्यालय तथा केंद्रीय विद्यालय एवं दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा रहते हुए कई अन्य राष्ट्रीय संसदीय वाद–विवाद प्रतियोगिताओं की विजेता
3. NCC में .22 राइफल शूटिंग में सर्वश्रेष्ठ निशानेबाज़

कार्यक्षेत्र: 
1. एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन में प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर (कैलाश सत्यार्थी जी के ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ का हिस्सा, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता)

2. प्रतीक (पूर्व में हृदय फाउंडेशन) की संस्थापक — एक गैर-सरकारी संगठन, जो मानवाधिकारों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों के मुद्दों एवं पर्यावरण के लिए कार्य करता है

3. दिल्ली महिला आयोग, दिल्ली सरकार (NCT of Delhi) में पूर्व कार्यक्रम समन्वयक

4. अभिव्यंजना — वाद–विवाद, नाट्य, कविता एवं सृजनात्मक लेखन समिति की पूर्व अध्यक्ष मोतीलाल नेहरू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय
5. राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) आर्मी, रक्षा मंत्रालय में बी एवं सी प्रमाणपत्र धारक

रामलीला में माता कौशल्या, माता शबरी एवं सती सुलोचना की भूमिकाएँ निभाईं

दिल्ली स्थित सुखमंच थिएटर ग्रुप की सदस्य, जिसकी स्थापना महान अभिनेता एवं निर्देशक शिल्पी मारवाह द्वारा की गई

मैं एक प्रोफेशनल सामाजिक कार्यकर्ता/उद्यमी हूँ, जिन्हें नाट्य एवं मंच प्रदर्शन में बीस से अधिक वर्षों का अनुभव तथा सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में दस से अधिक वर्षों का अनुभव है।

मंच और माइक के प्रति मेरा जुनून उतना ही अजेय है जितना अपने पेशेवर कार्य के प्रति मेरा समर्पण।

मेरी कहानी कहने की शैली सभी आयु वर्ग के लोगों द्वारा पसंद की जाती है।

मुझे देश दुनिया की यात्रा करना पसंद है और मेरे जीवन में मित्रों के रूप में कुछ अत्यंत अद्भुत आत्माओं का आशीर्वाद मिला है।

मैं अपने कार्य और मंच प्रस्तुतियों के माध्यम से सृजन करने, प्रश्न उठाने और सनातन के प्रति सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए यहाँ हूँ, ताकि दुनिया को पहले से अधिक शांतिपूर्ण और स्वीकारशील बनाया जा सके।

मेरे जीवन का मंत्र है — गैर-आलोचनात्मक होना, क्योंकि मैं observe करती हूँ, assume नहीं।
जय सियाराम????????

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