
मैं, सुनील गुप्ता (जन्म वर्ष 1961), विगत लगभग 45 वर्षों से दिल्ली की रामलीलाओं से भावनात्मक, आत्मिक और साधनात्मक रूप से जुड़ा हुआ हूँ। मेरा यह संबंध केवल मंचीय सहभागिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भगवान श्रीराम के प्रति मेरी निस्वार्थ भक्ति, अटूट श्रद्धा और अगाध प्रेम की सजीव अभिव्यक्ति है।
दिल्ली की अनेक प्रतिष्ठित रामलीलाओं में सहभागी बनने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है। विशेष रूप से रामलीला मैदान, अशोक विहार फेज–1 एवं फेज–2, शालीमार बाग, नेताजी सुभाष पैलेस, हौज़ खास, पंजाबी बाग सहित अनेक स्थानों पर मैंने अपनी भूमिका निभाई है। इसके अतिरिक्त ओरछा, अयोध्या तथा अन्य कई पावन धार्मिक नगरों में भी रामलीला का अंग बनकर मैंने रावण जैसे सशक्त और विचारोत्तेजक पात्र का निर्वहन किया है।
मेरे लिए रावण का पात्र केवल अभिनय नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा, विवेक और सत्य के संदेश को जन–जन तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम रहा है। प्रत्येक वर्ष सादगी, श्रद्धा और पूर्ण निष्ठा के साथ स्वयं को इस पात्र में ढालकर मंच पर उतरना—यह सब किसी यश, धन या प्रसिद्धि की कामना से नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम की कृपा और सेवा–भावना से प्रेरित होकर किया गया है।
गत चार वर्षों से पुनः दिल्ली आकर मैं रामलीला में सक्रिय रूप से सहभागी हूँ और आज भी मेरे हृदय में वही उत्साह, वही भक्ति और वही समर्पण जीवंत है। मेरे लिए रामलीला केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक साधना है—जिसमें मेरा जीवन, मेरा विश्वास और मेरी आस्था पूर्णतः समाहित है।
जय श्री राम
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